श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 111: मास, पक्ष एवं तिथिसम्बन्धी विभिन्न व्रतोपवासके फलका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.111.1 
युधिष्ठिर उवाच
सर्वेषामेव वर्णानां म्लेच्छानां च पितामह।
उपवासे मतिरियं कारणं च न विद्महे॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! सभी वर्णों के लोग, यहाँ तक कि म्लेच्छ वर्ण के लोग भी व्रत करते हैं, किन्तु इसका कारण क्या है? यह मेरी समझ में नहीं आता॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! People of all castes and even the mlechha castes devote themselves to fasting, but what is the reason for this? I do not understand this.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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