Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.110.4: बड़े भाई को चाहिए कि परिस्थिति के अनुसार अंधा, मूर्ख और विद्वान् बन जाए। अर्थात् यदि छोटे भाई कोई अपराध करें, तो उसे देखकर भी न देखे। उसे जानकर भी अनभिज्ञ होने का नाटक करना चाहिए और उनसे इस प्रकार बात करनी चाहिए कि उनकी अपराध करने की प्रवृत्ति ही समाप्त हो जाए।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.110.4 
अन्ध: स्यादन्धवेलायां जड: स्यादपि वा बुध:।
परिहारेण तद् ब्रूयाद् यस्तेषां स्याद् व्यतिक्रम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
बड़े भाई को चाहिए कि परिस्थिति के अनुसार अंधा, मूर्ख और विद्वान् बन जाए। अर्थात् यदि छोटे भाई कोई अपराध करें, तो उसे देखकर भी न देखे। उसे जानकर भी अनभिज्ञ होने का नाटक करना चाहिए और उनसे इस प्रकार बात करनी चाहिए कि उनकी अपराध करने की प्रवृत्ति ही समाप्त हो जाए।॥4॥
 
The elder brother should become blind, stupid and learned according to the situation. That is, if the younger brothers commit a crime, he should not see it even if he sees it. He should pretend to be unaware even if he knows it and should talk to them in such a way that their tendency to commit crime vanishes.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)