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mahabharat 13.110.2: भीष्म ने कहा, "हे भरतनंदन! आप अपने भाइयों में सबसे बड़े हैं; इसलिए हमेशा बड़ों के अनुरूप व्यवहार करें। जिस प्रकार गुरु अपने शिष्यों के साथ बड़े आदर से पेश आते हैं, उसी प्रकार आपको भी अपने भाइयों के साथ वैसा ही आदर से पेश आना चाहिए।"   |   mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.110.2 
भीष्म उवाच
ज्येष्ठवत् तात वर्तस्व ज्येष्ठोऽसि सततं भवान्।
गुरोर्गरीयसी वृत्तिर्या च शिष्यस्य भारत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "हे भरतनंदन! आप अपने भाइयों में सबसे बड़े हैं; इसलिए हमेशा बड़ों के अनुरूप व्यवहार करें। जिस प्रकार गुरु अपने शिष्यों के साथ बड़े आदर से पेश आते हैं, उसी प्रकार आपको भी अपने भाइयों के साथ वैसा ही आदर से पेश आना चाहिए।"
 
Bhishma said, "My dear Bharatanandan, you are the eldest among your brothers; therefore, always behave in a manner befitting an elder. Just as a Guru treats his disciples with great respect, you should also treat your brothers with the same respect.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)