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mahabharat 13.110.17-18h: बड़े भाई के लिए उचित है कि वह अपने छोटे भाइयों को जीविका प्रदान करे और उनका पालन-पोषण करे। छोटे भाइयों का भी कर्तव्य है कि वे अपने बड़े भाई को प्रणाम करें और उसकी इच्छा का पालन करें। उन्हें अपने बड़े भाई को अपना पिता मानना ​​चाहिए और उसके संरक्षण में रहना चाहिए।॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  13.110.17-18h 
स ह्येषां वृत्तिदाता स्यात् स चैतान् प्रतिपालयेत्।
कनिष्ठास्तं नमस्येरन् सर्वे छन्दानुवर्तिन:॥ १७॥
तमेव चोपजीवेरन् यथैव पितरं तथा।
 
 
अनुवाद
बड़े भाई के लिए उचित है कि वह अपने छोटे भाइयों को जीविका प्रदान करे और उनका पालन-पोषण करे। छोटे भाइयों का भी कर्तव्य है कि वे अपने बड़े भाई को प्रणाम करें और उसकी इच्छा का पालन करें। उन्हें अपने बड़े भाई को अपना पिता मानना ​​चाहिए और उसके संरक्षण में रहना चाहिए।॥17 1/2॥
 
It is appropriate for the elder brother to provide livelihood to his younger brothers and nurture them. It is also the duty of the younger brothers to bow down before their elder brother and follow his wishes. They should consider their elder brother as their father and live under his protection.॥17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)