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mahabharat 13.110.16: भरतनन्दन! माता की महिमा सबसे बड़ी है, इसीलिए लोग उसका विशेष आदर करते हैं। भरत! पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई को ही पिता मानना ​​चाहिए॥16॥   |   mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.110.16 
माता गरीयसी यच्च तेनैतां मन्यते जन:।
ज्येष्ठो भ्राता पितृसमो मृते पितरि भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! माता की महिमा सबसे बड़ी है, इसीलिए लोग उसका विशेष आदर करते हैं। भरत! पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई को ही पिता मानना ​​चाहिए॥16॥
 
Bharatanandan! Mother's glory is the greatest, that is why people respect her specially. Bharat! After the father's death, the elder brother should be considered as the father.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)