Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.110.14-15: अभिमान की दृष्टि से उपाध्याय दस गुरुओं से, पिता दस गुरुओं से और माता दस पिताओं से भी बढ़कर हैं। माता अपने अभिमान से सम्पूर्ण पृथ्वी का भी तिरस्कार करती है। अतः माता के समान कोई दूसरा गुरु नहीं है॥ 14-15॥ | mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दशाचार्यानुपाध्याय उपाध्यायान् पिता दश॥ १४॥
दश चैव पितॄन् माता सर्वां वा पृथिवीमपि।
गौरवेणाभिभवति नास्ति मातृसमो गुरु:॥ १५॥
अनुवाद
अभिमान की दृष्टि से उपाध्याय दस गुरुओं से, पिता दस गुरुओं से और माता दस पिताओं से भी बढ़कर हैं। माता अपने अभिमान से सम्पूर्ण पृथ्वी का भी तिरस्कार करती है। अतः माता के समान कोई दूसरा गुरु नहीं है॥ 14-15॥
In terms of pride, Upadhyaya is greater than ten teachers, father is greater than ten teachers and mother is greater than ten fathers. Mother, with her pride, even disdains the entire earth. Hence, there is no other Guru like mother.॥ 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥