Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.110.12: यदि भाइयों का हिस्सा बँट न पाया हो और सबने मिलकर व्यापार आदि से धन इकट्ठा कर लिया हो और उस स्थिति में पिता के जीवित रहते यदि सब अलग होना चाहें, तो पिता के लिए उचित है कि वह किसी को कम और किसी को अधिक धन न दे, अर्थात् सब पुत्रों को बराबर-बराबर हिस्सा दे।॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.110: बड़े और छोटे भाईके पारस्परिक बर्ताव तथा माता-पिता, आचार्य आदि गुरुजनोंके गौरवका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भ्रातृॄणामविभक्तानामुत्थानमपि चेत् सह।
न पुत्रभागं विषमं पिता दद्यात् कदाचन॥ १२॥
अनुवाद
यदि भाइयों का हिस्सा बँट न पाया हो और सबने मिलकर व्यापार आदि से धन इकट्ठा कर लिया हो और उस स्थिति में पिता के जीवित रहते यदि सब अलग होना चाहें, तो पिता के लिए उचित है कि वह किसी को कम और किसी को अधिक धन न दे, अर्थात् सब पुत्रों को बराबर-बराबर हिस्सा दे।॥12॥
If the shares of the brothers have not been divided and all of them have accumulated wealth together through business etc., and in that situation if all of them wish to separate while the father is alive, it is appropriate for the father that he should never give less money to anyone and more to anyone, i.e. he should give equal share to all the sons.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥