नाकर्मशीले पुरुषे वसामि
न नास्तिके साङ्करिके कृतघ्ने।
न भिन्नवृत्ते न नृशंसवर्णे
न चापि चौरे न गुरुष्वसूये॥ ७॥
अनुवाद
मैं उस मनुष्य में निवास नहीं करता जो आलसी, नास्तिक, वर्णसंकर, कृतघ्न, दुष्ट, क्रूर, चोर और गुरुजनों में दोष देखने वाला है ॥7॥
I do not reside in a person who is lazy, an atheist, of a mixed caste, ungrateful, wicked, cruel, a thief and one who finds faults in the teachers. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥