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mahabharat 13.109.99: हे पुरुषसिंह! भोजन करते समय अन्न पर संदेह नहीं करना चाहिए और जो व्यक्ति अपना कल्याण चाहता है, उसे भोजन के अंत में दही नहीं पीना चाहिए ॥99॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.109.99 
भुञ्जानो मनुजव्याघ्र नैव शंकां समाचरेत्।
दधि चाप्यनुपानं वै न कर्तव्यं भवार्थिना॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषसिंह! भोजन करते समय अन्न पर संदेह नहीं करना चाहिए और जो व्यक्ति अपना कल्याण चाहता है, उसे भोजन के अंत में दही नहीं पीना चाहिए ॥99॥
 
O purushsingh! One should not doubt the food while eating and a person who wants his own well-being should not drink curd at the end of the meal. ॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)