Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.92: अपना कल्याण चाहने वाले श्रेष्ठ पुरुष को पीपल, बरगद और गूलर के वृक्षों के फल तथा सूर्य के हरे पत्ते नहीं खाने चाहिए ॥92॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  13.109.92 
पिप्पलं च वटं चैव शणशाकं तथैव च।
उदुम्बरं न खादेच्च भवार्थी पुरुषोत्तम:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
अपना कल्याण चाहने वाले श्रेष्ठ पुरुष को पीपल, बरगद और गूलर के वृक्षों के फल तथा सूर्य के हरे पत्ते नहीं खाने चाहिए ॥92॥
 
A noble man seeking his own welfare should not eat the fruits of the Peepal, Banyan and Sycamore trees as well as the green leaves of the Sun. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)