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mahabharat 13.109.86-87h: हे पुरुषश्रेष्ठ! दूसरों के पहने हुए वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। फटे हुए किनारे वाले वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। सोने के लिए अलग वस्त्र रखने चाहिए। सड़क पर चलने के लिए अलग वस्त्र और देवताओं की पूजा के लिए अलग वस्त्र रखने चाहिए। 86 1/2।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.109.86-87h 
तथा नान्यधृतं धार्यं न चापदशमेव च।
अन्यदेव भवेद् वास: शयनीये नरोत्तम॥ ८६॥
अन्यद् रथ्यासु देवानामर्चायामन्यदेव हि।
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! दूसरों के पहने हुए वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। फटे हुए किनारे वाले वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। सोने के लिए अलग वस्त्र रखने चाहिए। सड़क पर चलने के लिए अलग वस्त्र और देवताओं की पूजा के लिए अलग वस्त्र रखने चाहिए। 86 1/2।
 
O best of men! One should not wear clothes worn by others. One should not wear clothes whose edges are torn. One should have different clothes for sleeping. One should keep different clothes for walking on the streets and different clothes for worshipping the gods. 86 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)