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mahabharat 13.109.65-66h: इसलिए जब कोई वृद्ध व्यक्ति आपके पास आए तो उसे नमस्कार करके बैठने के लिए आसन दीजिए और स्वयं भी हाथ जोड़कर उसकी सेवा में उपस्थित रहिए। फिर जब वह जाने लगे तो कुछ दूर तक उसके पीछे-पीछे चलिए।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  13.109.65-66h 
अभिवादयीत वृद्धांश्च दद्याच्चैवासनं स्वयम्॥ ६५॥
कृतांजलिरुपासीत गच्छन्तं पृष्ठतोऽन्वियात् ।
 
 
अनुवाद
इसलिए जब कोई वृद्ध व्यक्ति आपके पास आए तो उसे नमस्कार करके बैठने के लिए आसन दीजिए और स्वयं भी हाथ जोड़कर उसकी सेवा में उपस्थित रहिए। फिर जब वह जाने लगे तो कुछ दूर तक उसके पीछे-पीछे चलिए।
 
Therefore, when an elderly person comes to you, greet him and offer him a seat to sit and yourself remain present to serve him with folded hands. Then when he starts leaving, follow him for some distance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)