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mahabharat 13.109.6: अच्छे आचरण से ही मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है, अच्छे आचरण से ही धन प्राप्त करता है और अच्छे आचरण से ही इस लोक में तथा परलोक में यश प्राप्त करता है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.109.6 
आचाराल्लभते ह्यायुराचाराल्लभते श्रियम्।
आचारात् कीर्तिमाप्नोति पुरुष: प्रेत्य चेह च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अच्छे आचरण से ही मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है, अच्छे आचरण से ही धन प्राप्त करता है और अच्छे आचरण से ही इस लोक में तथा परलोक में यश प्राप्त करता है ॥6॥
 
It is by good conduct that a man attains longevity, it is by good conduct that he obtains wealth, and it is by good conduct that he attains fame in this world as well as the next. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)