Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.35: जो अपंग (अंधे, एक आँख वाले आदि), अधिक अंग वाले (पैर वाले आदि), अशिक्षित, निंदित, कुरूप, दरिद्र और दुर्बल हैं, उनकी निन्दा करना उचित नहीं है ॥ 35॥ | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अपंग (अंधे, एक आँख वाले आदि), अधिक अंग वाले (पैर वाले आदि), अशिक्षित, निंदित, कुरूप, दरिद्र और दुर्बल हैं, उनकी निन्दा करना उचित नहीं है ॥ 35॥
It is not right to criticise people who are handicapped (blind, one-eyed etc.), have excess limbs (legged etc.), are uneducated, the condemned, the ugly, the poor and the weak. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥