Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.28-30: दूसरों के पहने हुए वस्त्र और जूते न पहनें । सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करें । पैरों से पैर न दबाएँ । अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथियों को सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करें - स्त्रियों के साथ संभोग न करें । किसी की निन्दा, निन्दा या चुगली न करें ॥28-30॥ | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपानहौ च वस्त्रं च धृतमन्यैर्न धारयेत्॥ २८॥
ब्रह्मचारी च नित्यं स्यात् पादं पादेन नाक्रमेत्।
अमावास्यां पौर्णमास्यां चतुर्दश्यां च सर्वश:॥ २९॥
अष्टम्यां सर्वपक्षाणां ब्रह्मचारी सदा भवेत्।
आक्रोशं परिवादं च पैशुन्यं च विवर्जयेत्॥ ३०॥
अनुवाद
दूसरों के पहने हुए वस्त्र और जूते न पहनें । सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करें । पैरों से पैर न दबाएँ । अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथियों को सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करें - स्त्रियों के साथ संभोग न करें । किसी की निन्दा, निन्दा या चुगली न करें ॥28-30॥
Do not wear clothes and shoes worn by others. Always follow celibacy. Do not press feet with feet. Always remain celibate on the new moon, full moon, Chaturdashi and Ashtami tithi of all fortnights - do not have sexual intercourse with women. Do not criticise, defame or backbite anyone.॥28-30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥