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mahabharat 13.109.22: स्त्री के शरीर पर जितने रोम होते हैं, उतने ही वर्षों तक व्यभिचारी पुरुषों को नरक में रहना पड़ता है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.109.22 
यावन्तो रोमकूपा: स्यु: स्त्रीणां गात्रेषु निर्मिता:।
तावद् वर्षसहस्राणि नरकं पर्युपासते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
स्त्री के शरीर पर जितने रोम होते हैं, उतने ही वर्षों तक व्यभिचारी पुरुषों को नरक में रहना पड़ता है ॥22॥
 
The number of hair follicles on a woman's body is the number of years for which adulterous men have to stay in hell. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)