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mahabharat 13.109.20-21: किसी भी जाति के पुरुष को कभी भी पराई स्त्रियों के साथ समागम नहीं करना चाहिए । दूसरे की स्त्री के साथ समागम करने से पुरुष का जीवन शीघ्र ही नष्ट हो जाता है । संसार में पराई स्त्री के साथ समागम के समान कोई दूसरा कर्म नहीं है जो पुरुष के जीवन को नष्ट कर दे ॥ 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  13.109.20-21 
परदारा न गन्तव्या सर्ववर्णेषु कर्हिचित्॥ २०॥
न हीदृशमनायुष्यं लोके किंचन विद्यते।
यादृशं पुरुषस्येह परदारोपसेवनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
किसी भी जाति के पुरुष को कभी भी पराई स्त्रियों के साथ समागम नहीं करना चाहिए । दूसरे की स्त्री के साथ समागम करने से पुरुष का जीवन शीघ्र ही नष्ट हो जाता है । संसार में पराई स्त्री के साथ समागम के समान कोई दूसरा कर्म नहीं है जो पुरुष के जीवन को नष्ट कर दे ॥ 20-21॥
 
Men of any caste should never have intercourse with other women. A man's life ends quickly by having sex with another's wife. There is no other act in the world that can destroy a man's life like having sex with another's wife. ॥ 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)