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mahabharat 13.109.16: प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त (अर्थात सूर्योदय से दो घण्टे पूर्व) में उठकर धर्म और अर्थ का चिन्तन करें। फिर बिस्तर से उठकर शौच और स्नान आदि से निवृत्त होकर प्रातः और सायं हाथ जोड़कर श्वास-प्रश्वास क्रिया करें। 16॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.109.16 
ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्येत धर्मार्थौ चानुचिंतयेत्।
उत्थायाचम्य तिष्ठेत पूर्वां संध्यां कृताञ्जलि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त (अर्थात सूर्योदय से दो घण्टे पूर्व) में उठकर धर्म और अर्थ का चिन्तन करें। फिर बिस्तर से उठकर शौच और स्नान आदि से निवृत्त होकर प्रातः और सायं हाथ जोड़कर श्वास-प्रश्वास क्रिया करें। 16॥
 
Wake up every day in Brahmamuhurta (ie two hours before sunrise) and think about religion and artha. Then after getting up from the bed, after taking toilet and bath, do Ashamana (breathing ceremony) in the morning and evening with folded hands. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)