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mahabharat 13.109.153: युधिष्ठिर! इस प्रकार मैंने तुम्हें आयु बढ़ाने के नियम संक्षेप में बता दिए हैं। जो नियम शेष रह गए हैं, उन्हें तुम तीनों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों से पूछकर सीख लो।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  13.109.153 
एष ते लक्षणोद्देश आयुष्याणां प्रकीर्तित:।
शेषस्त्रैविद्यवृद्धेभ्य: प्रत्याहार्यो युधिष्ठिर॥ १५३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस प्रकार मैंने तुम्हें आयु बढ़ाने के नियम संक्षेप में बता दिए हैं। जो नियम शेष रह गए हैं, उन्हें तुम तीनों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मणों से पूछकर सीख लो।
 
Yudhishthira! Thus I have briefly described to you the rules for increasing lifespan. The rules that are left, you should learn them by asking the Brahmins who are well versed in the knowledge of the three Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)