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mahabharat 13.109.141: नरेश्वर! स्नान के बाद ही ब्राह्मणों का पूजन, देवताओं को नमस्कार और गुरुजनों को नमस्कार करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  13.109.141 
ब्राह्मणान् पूजयेच्चापि तथा स्नात्वा नराधिप।
देवांश्च प्रणमेत् स्नातो गुरूंश्चाप्यभिवादयेत्॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! स्नान के बाद ही ब्राह्मणों का पूजन, देवताओं को नमस्कार और गुरुजनों को नमस्कार करना चाहिए।
 
Nareshwar! Worship of Brahmins, salutations to gods and salutations to teachers should be done only after bathing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)