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mahabharat 13.109.128: राजेन्द्र! मनुष्य को चाहिए कि वह मन को एकाग्र करके पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके हजामत बनाए। ऐसा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है ॥128॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  13.109.128 
प्राङ्मुख: श्मश्रुकर्माणि कारयेत् सुसमाहित:।
उदङ्मुखो वा राजेन्द्र तथायुर्विन्दते महत्॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! मनुष्य को चाहिए कि वह मन को एकाग्र करके पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके हजामत बनाए। ऐसा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है ॥128॥
 
Rajendra! A man should concentrate his mind and shave facing east or north. By doing so one attains a long life. ॥ 128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)