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mahabharat 13.109.124-125h: हे भरतनन्दन! यदि कन्या उत्पन्न हो तो उसका विवाह किसी बुद्धिमान एवं श्रेष्ठ वर के साथ कर दो। अपने पुत्र का विवाह किसी कुलीन कुल की कन्या से करो और कुलीन कुल के लोगों को ही सेवक नियुक्त करो॥124 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 124-125h
 
 
श्लोक  13.109.124-125h 
कन्या चोत्पाद्य दातव्या कुलपुत्राय धीमते॥ १२४॥
पुत्रा निवेश्याश्च कुलाद्‍भृत्या लभ्याश्च भारत।
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! यदि कन्या उत्पन्न हो तो उसका विवाह किसी बुद्धिमान एवं श्रेष्ठ वर के साथ कर दो। अपने पुत्र का विवाह किसी कुलीन कुल की कन्या से करो और कुलीन कुल के लोगों को ही सेवक नियुक्त करो॥124 1/2॥
 
O Bharatanandan! If a girl is born then marry her to an intelligent and noble groom. Marry your son to a girl from a noble family and appoint only people from noble families as servants.॥ 124 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)