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महात्मनोऽतिगुह्यानि न वक्तव्यानि कर्हिचित्।
अगम्याश्च न गच्छेत राज्ञ: पत्नीं सखीस्तथा॥ ११५॥
अनुवाद
महापुरुष के गुप्त कर्म कभी किसी को नहीं बताने चाहिए। पराई स्त्रियाँ सदैव अगम्य होती हैं, उनसे कभी संभोग नहीं करना चाहिए। राजा की पत्नी या उसकी सहेलियों के पास कभी नहीं जाना चाहिए।
The secret deeds of a great man should never be revealed to anyone. Other people's women are always unreachable, never have intercourse with them. Never go to the king's wife or her friends.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥