Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.109.114: यदि कभी घर में उद्दीपक, गिद्ध, कपोत (जंगली कबूतर) और भ्रमर नामक पक्षी आ जाएँ तो उन्हें सदैव शांत करना चाहिए; क्योंकि ये अशुभ होते हैं। महात्माओं की निन्दा भी मनुष्य को हानि पहुँचाती है ॥114॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  13.109.114 
उद्दीपकाश्च गृध्राश्च कपोता भ्रमरास्तथा।
निविशेयुर्यदा तत्र शान्तिमेव तदाऽऽचरेत्।
अमंगल्यानि चैतानि तथाक्रोशो महात्मनाम्॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
यदि कभी घर में उद्दीपक, गिद्ध, कपोत (जंगली कबूतर) और भ्रमर नामक पक्षी आ जाएँ तो उन्हें सदैव शांत करना चाहिए; क्योंकि ये अशुभ होते हैं। महात्माओं की निन्दा भी मनुष्य को हानि पहुँचाती है ॥114॥
 
If birds named Uddipak, Vulture, Kapot (wild pigeon) and Bhramar ever come to the house, they should always be pacified; Because these are inauspicious. Criticism of Mahatmas also brings harm to man. 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)