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mahabharat 13.109.108: जब काम उत्पन्न हो जाए, तब अपने-अपने पवित्र स्थान पर कुल्ला करना चाहिए, तीन बार जल पीना चाहिए और दो बार ओठ पोंछना चाहिए - ऐसा करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है ॥108॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  13.109.108 
स्वे स्वे तीर्थे समाचम्य कार्ये समुपकल्पिते।
त्रि:पीत्वाऽऽपो द्वि: प्रमृज्य कृतशौचो भवेन्नर:॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
जब काम उत्पन्न हो जाए, तब अपने-अपने पवित्र स्थान पर कुल्ला करना चाहिए, तीन बार जल पीना चाहिए और दो बार ओठ पोंछना चाहिए - ऐसा करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है ॥108॥
 
When the work arises, one should rinse his mouth at his respective holy place, drink water thrice and wipe his lips twice - by doing so a person becomes pure. ॥108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)