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mahabharat 13.109.106: पतित लोगों से बात करने की इच्छा न करें। उन्हें देखने से बचें और उनके संपर्क में न जाएँ। ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है ॥106॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 106
 
 
श्लोक  13.109.106 
पतितैस्तु कथां नेच्छेद् दर्शनं च विवर्जयेत्।
संसर्गं च न गच्छेत तथाऽऽयुर्विन्दते महत्॥ १०६॥
 
 
अनुवाद
पतित लोगों से बात करने की इच्छा न करें। उन्हें देखने से बचें और उनके संपर्क में न जाएँ। ऐसा करने से मनुष्य दीर्घायु प्राप्त करता है ॥106॥
 
Do not wish to talk with fallen people. Refrain from seeing them and never go in contact with them. By doing this, a man attains a long life.॥ 106॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)