| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 13.108.9  | दशैकरात्रान् दशपञ्चरात्रा-
नेकादशैकादशकान् क्रतूंश्च।
ज्योतिष्टोमानां च शतं यदिष्टं
फलेन तेनापि च नागतोऽहम्॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | मैंने एक रात्रि में सम्पन्न होने वाले दस यज्ञ, पाँच रात्रि में सम्पन्न होने वाले दस यज्ञ, ग्यारह रात्रि में सम्पन्न होने वाले ग्यारह यज्ञ और ज्योतिष्टोम नामक सौ यज्ञ किए हैं, परंतु उन यज्ञों के फल से भी मैं यहाँ नहीं आया हूँ॥9॥ | | | | I have performed ten yagnas that can be completed in one night, ten yagnas that can be completed in five nights, eleven yagnas that can be completed in eleven nights and one hundred yagnas called Jyotishtoma, but even with the result of those yagnas I have not come here.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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