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mahabharat 13.108.7: भगीरथ! देवता, गन्धर्व और मनुष्य बिना तप किए यहाँ नहीं आ सकते। फिर तुम यहाँ कैसे आये?॥7॥   |   mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.108.7 
न हि देवा न गंधर्वा न मनुष्या भगीरथ।
आयान्त्यतप्ततपस: कथं वै त्वमिहागत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भगीरथ! देवता, गन्धर्व और मनुष्य बिना तप किए यहाँ नहीं आ सकते। फिर तुम यहाँ कैसे आये?॥7॥
 
Bhageeratha! Gods, Gandharvas and humans cannot come here without performing penance. Then how did you come here?'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)