श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.108.43 
भीष्म उवाच
इत्युक्तवन्तं ब्रह्मा तु राजानं स भगीरथम्।
पूजयामास पूजार्हं विधिदृष्टेन कर्मणा॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! जब राजा भगीरथ ने ऐसा कहा, तब ब्रह्माजी ने शास्त्रानुसार पूज्य राजा का विशेष आदर किया ॥43॥
 
Bhishmaji says – King! When King Bhagiratha said this, Lord Brahma showed special respect to the respected king as per the scriptures. 43॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas