Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.108.40-41: उस अनुष्ठान के पूर्ण होने पर सहस्रों ब्राह्मण और ऋषिगण मेरे पास आये। वे सभी मुझ पर अत्यन्त प्रसन्न हुए। प्रभु! उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक मुझे ब्रह्मलोक जाने का आदेश दिया। प्रभु! मैं उन सहस्रों प्रसन्न ब्राह्मणों के आशीर्वाद से इस लोक में आया हूँ। कृपया इसमें अन्यथा विचार न करें। ॥40-41॥ | mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो मे ब्राह्मणास्तुष्टास्तस्मिन् कर्मणि साधिते।
सहस्रमृषयश्चासन् ये वै तत्र समागता:॥ ४०॥
उक्तस्तैरस्मि गच्छ त्वं ब्रह्मलोकमिति प्रभो।
प्रीतेनोक्तसहस्रेण ब्राह्मणानामहं प्रभो।
इमं लोकमनुप्राप्तो मा भूत् तेऽत्र विचारणा॥ ४१॥
अनुवाद
उस अनुष्ठान के पूर्ण होने पर सहस्रों ब्राह्मण और ऋषिगण मेरे पास आये। वे सभी मुझ पर अत्यन्त प्रसन्न हुए। प्रभु! उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक मुझे ब्रह्मलोक जाने का आदेश दिया। प्रभु! मैं उन सहस्रों प्रसन्न ब्राह्मणों के आशीर्वाद से इस लोक में आया हूँ। कृपया इसमें अन्यथा विचार न करें। ॥40-41॥
When that ritual was completed, thousands of Brahmins and sages came to me. They were all very pleased with me. Lord! They happily ordered me to go to Brahmaloka. Lord! I have come to this world due to the blessings of those thousands of pleased Brahmins. Please do not think otherwise in this. ॥ 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥