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mahabharat 13.108.39: पहले इंद्र ने स्वयं इस व्रत को गुप्त रखा था। तत्पश्चात शुक्राचार्य ने तपस्या करके इसका ज्ञान प्राप्त किया। फिर उनके तेज से इसका माहात्म्य सर्वत्र प्रसिद्ध हो गया। पितामह! मैंने भी अंततः इसी व्रत का पालन करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.108.39 
इन्द्रेण गुह्यं निहितं वै गुहायां
यद्भार्गवस्तपसेहाभ्यविन्दत्।
जाज्वल्यमानमुशनस्तेजसेह
तत्साधयामासमहं वरेण्य॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
पहले इंद्र ने स्वयं इस व्रत को गुप्त रखा था। तत्पश्चात शुक्राचार्य ने तपस्या करके इसका ज्ञान प्राप्त किया। फिर उनके तेज से इसका माहात्म्य सर्वत्र प्रसिद्ध हो गया। पितामह! मैंने भी अंततः इसी व्रत का पालन करना आरम्भ कर दिया।
 
Earlier Indra himself kept the ritual of fasting a secret. After that Shukracharya gained knowledge of it through penance. Then due to his brilliance its greatness became known everywhere. Best grandfather! I too eventually started the practice of the same fasting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)