Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.108.38: मैंने सरयू, बहुदा, गंगा और नैमिषारण्य आदि तीर्थों का भ्रमण किया है और दस लाख गौएँ दान की हैं; परंतु उससे भी मुझे यहाँ आने का फल नहीं मिला (केवल व्रत के प्रभाव से ही मुझे यह दुर्लभ लोक प्राप्त हुआ है)॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.108.38 
सरय्वां बाहुदायां च गंगायामथ नैमिषे।
गवां शतानामयुतमददं न च तेन वै॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मैंने सरयू, बहुदा, गंगा और नैमिषारण्य आदि तीर्थों का भ्रमण किया है और दस लाख गौएँ दान की हैं; परंतु उससे भी मुझे यहाँ आने का फल नहीं मिला (केवल व्रत के प्रभाव से ही मुझे यह दुर्लभ लोक प्राप्त हुआ है)॥ 38॥
 
I have visited the holy places of Sarayu, Bahuda, Ganga and Naimisharanya and have donated ten lakh cows; but even that has not resulted in my coming here (only due to the effect of fasting I have attained this rare world).॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)