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mahabharat 13.108.3: भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! मनुष्य जितना तप करता है, उसके अनुसार उसे उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है; किन्तु हे कुन्तीपुत्र! मेरी राय में उपवास से बढ़कर कोई श्रेष्ठ तप नहीं है।"   |   mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.108.3 
भीष्म उवाच
तप: प्रचक्षते यावत् तावल्लोको युधिष्ठिर।
मतं ममात्र कौन्तेय तपो नानशनात् परम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "युधिष्ठिर! मनुष्य जितना तप करता है, उसके अनुसार उसे उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है; किन्तु हे कुन्तीपुत्र! मेरी राय में उपवास से बढ़कर कोई श्रेष्ठ तप नहीं है।"
 
Bhishma said, "Yudhishthira! A man attains the best worlds according to the amount of penance he performs; but, son of Kunti! In my opinion, there is no better penance than fasting."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)