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श्लोक  13.108.21-22h 
दक्षिणावयवा: केचिद् वेदैर्ये सम्प्रकीर्तिता:॥ २१॥
वाजपेयेषु दशसु प्रादां तेष्वपि चाप्यहम्।
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त मैंने दस वाजपेय यज्ञ करके दक्षिणा के रूप में वेदों में वर्णित सभी वस्तुएं भी दान कर दीं।
 
Besides these, I also donated all the things that are mentioned in the Vedas as components of Dakshina after performing ten Vajapeya Yagyas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)