Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.108.11-12: मैं यहाँ उस पुण्य के कारण भी नहीं आया हूँ, जो मैंने पुष्कर तीर्थ में ब्राह्मणों को सैकड़ों-हजारों बार एक लाख घोड़े और दो लाख गौएँ दान में दी हैं, तथा जो सोने के उत्तम चन्द्रहार से सुसज्जित जम्बूनादि आभूषणों से सुसज्जित साठ हजार सुन्दर कन्याएँ मैंने हजारों बार दान में दी हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  13.108.11-12 
दशायुतानि चाश्वानां गोऽयुतानि च विंशतिम्।
पुष्करेषु द्विजातिभ्य: प्रादां शतसहस्रश:॥ ११॥
सुवर्णचन्द्रोत्तमधारिणीनां
कन्योत्तमानामददं सहस्रम्।
षष्टिं सहस्राणि विभूषितानां
जाम्बूनदैराभरणैर्न तेन॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं यहाँ उस पुण्य के कारण भी नहीं आया हूँ, जो मैंने पुष्कर तीर्थ में ब्राह्मणों को सैकड़ों-हजारों बार एक लाख घोड़े और दो लाख गौएँ दान में दी हैं, तथा जो सोने के उत्तम चन्द्रहार से सुसज्जित जम्बूनादि आभूषणों से सुसज्जित साठ हजार सुन्दर कन्याएँ मैंने हजारों बार दान में दी हैं।
 
I have not come here even by the virtue of the donation of one lakh horses and two lakh cows to the Brahmins at Pushkar Tirtha hundreds and thousands of times and of sixty thousand beautiful girls adorned with Jambunad ornaments wearing the finest moon-necklace of gold, which I have donated thousands of times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)