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mahabharat 13.107.63: जो मनुष्य प्रतिदिन इस प्रसंग को सुनता है, अथवा इसका पाठ करता है, वह जितेन्द्रिय होकर गौतम ब्राह्मण के समान ब्रह्मलोक को जाता है ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.107.63 
इदं य: शृणुयान्नित्यं य: पठेद्वा जितेन्द्रिय:।
स याति ब्रह्मणो लोकं ब्राह्मणो गौतमो यथा॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन इस प्रसंग को सुनता है, अथवा इसका पाठ करता है, वह जितेन्द्रिय होकर गौतम ब्राह्मण के समान ब्रह्मलोक को जाता है ॥63॥
 
The man who listens to this incident every day, or recites it, being a Jitendriya, will go to Brahmalok like Gautam Brahmin. 63॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि हस्तिकूटो नाम द्वॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १०२॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अंतर्गत दानधर्मपर्वमें हस्तिकूट नामक एक सौ दोवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १०२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)