Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.107.55: मैं जानता हूँ कि आप राजा धृतराष्ट्र नहीं, अपितु वृत्रासुर का वध करने वाले शतक्रतु इन्द्र हैं और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निरीक्षण करते हुए विचरण कर रहे हैं। क्या मैंने मानसिक व्याकुलता में अपने वचनों द्वारा आपके प्रति कोई अपराध किया है?॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं जानता हूँ कि आप राजा धृतराष्ट्र नहीं, अपितु वृत्रासुर का वध करने वाले शतक्रतु इन्द्र हैं और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निरीक्षण करते हुए विचरण कर रहे हैं। क्या मैंने मानसिक व्याकुलता में अपने वचनों द्वारा आपके प्रति कोई अपराध किया है?॥ 55॥
I know that you are not King Dhritarashtra, but Shatakratu Indra, the slayer of Vritraasura, and are roaming around inspecting the entire universe. Have I committed any offence against you by my words in a fit of mental agitation?॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥