Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.107.54: गौतम बोले, "मैं उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ रथन्तर और बृहत्सामका गान गाए जाते हैं, जहाँ यज्ञकर्ता वेदी को कमल पुष्पों से आच्छादित करते हैं, तथा जहाँ सोम-पान करने वाले दिव्य घोड़ों पर सवार होकर यात्रा करते हैं, और मैं तुमसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।" 54.   |   mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.107.54 
गौतम उवाच
रथन्तरं यत्र बृहच्च गीयते
यत्र वेदी पुण्डरीकैस्तृणोति।
यत्रोपयाति हरिभि: सोमपीथी
तत्र त्वाहं हस्तिनं यातयिष्ये॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले, "मैं उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ रथन्तर और बृहत्सामका गान गाए जाते हैं, जहाँ यज्ञकर्ता वेदी को कमल पुष्पों से आच्छादित करते हैं, तथा जहाँ सोम-पान करने वाले दिव्य घोड़ों पर सवार होकर यात्रा करते हैं, और मैं तुमसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।" 54.
 
Gautama said, "I will go to the place where the Rathantara and the Brihatsamaka songs are sung, where the sacrificers cover the altar with lotus flowers, and where the Soma-drinkers travel on divine horses, and I will take back my elephant from you." 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)