Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.107.40: गौतम बोले, "हे राजन! स्वर्ग के शिखर पर प्रजापति के महान लोक हैं, जो स्वस्थ और शोक से रहित हैं। सम्पूर्ण जगत के प्राणी वहाँ पहुँचना चाहते हैं। मैं वहाँ जाकर आपसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.107.40 
गौतम उवाच
प्राजापत्या: सन्ति लोका महान्तो
नाकस्य पृष्ठे पुष्कला वीतशोका:।
मनीषिता: सर्वलोकोद्भवानां
तत्र त्वाहं हस्तिनं यातयिष्ये॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले, "हे राजन! स्वर्ग के शिखर पर प्रजापति के महान लोक हैं, जो स्वस्थ और शोक से रहित हैं। सम्पूर्ण जगत के प्राणी वहाँ पहुँचना चाहते हैं। मैं वहाँ जाकर आपसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।"
 
Gautama said, "O King! On the peak of heaven are the great realms of Prajapati, who are healthy and free from sorrow. The creatures of the whole world want to reach them. I will go there and take back my elephant from you. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)