Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.107.29: गौतम बोले, "हे राजन! उसके अतिरिक्त और भी बहुत से सनातन लोक हैं, जहाँ शुद्ध सुगन्ध व्याप्त है। वहाँ रजोगुण और दुःख का सर्वथा अभाव है। वे महान राजा सोम के लोक में निवास करते हैं। वहाँ पहुँचकर मैं आपसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।"   |   mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.107.29 
गौतम उवाच
ततोऽपरे भांति लोका: सनातना:
सुपुण्यगन्धा विरजा वीतशोका:।
सोमस्य राज्ञ: सदने महात्मन-
स्तत्र त्वाहं हस्तिनं यातयिष्ये॥ २९॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले, "हे राजन! उसके अतिरिक्त और भी बहुत से सनातन लोक हैं, जहाँ शुद्ध सुगन्ध व्याप्त है। वहाँ रजोगुण और दुःख का सर्वथा अभाव है। वे महान राजा सोम के लोक में निवास करते हैं। वहाँ पहुँचकर मैं आपसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।"
 
Gautama said, "O King! There are many other eternal worlds apart from that, where pure fragrance prevails. There is complete absence of Rajoguna and sorrow. They reside in the world of the great king Som. After reaching there, I will take back my elephant from you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)