Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.107.23: गौतम बोले, "यदि मैं नन्दन नामक वन में भी जाऊँ, जो सुन्दर पुष्पों से सुशोभित है, किन्नर राजाओं द्वारा सेवित है तथा नारद, गन्धर्व और अप्सराओं से सदैव प्रेम करता है, तो भी मैं तुमसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।" | mahabharat अध्याय 13.107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गौतम उवाच
सुपुष्पितं किन्नरराजजुष्टं
प्रियं वनं नंदनं नारदस्य।
गंधर्वाणामप्सरसां च शश्वत्
तत्र त्वाहं हस्तिनं यातयिष्ये॥ २३॥
अनुवाद
गौतम बोले, "यदि मैं नन्दन नामक वन में भी जाऊँ, जो सुन्दर पुष्पों से सुशोभित है, किन्नर राजाओं द्वारा सेवित है तथा नारद, गन्धर्व और अप्सराओं से सदैव प्रेम करता है, तो भी मैं तुमसे अपना हाथी वापस ले लूँगा।"
Gautama said, "Even if I go to the forest called Nandana which is decorated with beautiful flowers, served by the Kinnar-kings and is always loved by Narada, Gandharva and Apsaras, I will take back my elephant from you." 23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥