श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.106.8 
जघ्नुस्ता: पयसा पुत्रांस्तथा पौत्रान् विधुन्वती:।
पशूनवेक्षमाणाश्च साधुवृत्तेन दम्पती॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब अपहृत गौएँ अन्य पशुओं को देखतीं और अपने स्वामियों तथा बछड़ों को नहीं देखतीं, तब वे पीड़ा से शरीर काँपने लगतीं। उन दिनों सद्भक्तिपूर्वक दूध देकर वे अपहृत पति-पत्नी तथा उनके पुत्र-पौत्रों का भी नाश कर देतीं। ॥8॥
 
When the kidnapped cows saw other animals and did not see their masters and calves, they would start shaking their bodies in pain. By giving milk in good faith in those days, they destroyed the kidnapping husband and wife as well as their sons and grandsons. ॥8॥
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