श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.106.7 
येऽपि तत्रापिबन् क्षीरं घृतं दधि च मानवा:।
ब्राह्मणा: सहराजन्या: सर्वे नरकमाविशन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जहाँ गायों को हाँककर लाया जाता था, वहाँ उनका दूध, दही और घी खाने वाले सभी मनुष्य, चाहे वे ब्राह्मण हों या क्षत्रिय आदि, नरक में जाते थे।
 
Where the cows were brought after being driven away, all those men who consumed their milk, curd and ghee there, be it Brahmins or Kshatriyas, etc., went to hell. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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