श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  13.106.5-6 
चाण्डाल उवाच
ब्राह्मणस्य गवां राजन् ह्रियतीनां रज: पुरा।
सोममुध्वंसयामास तं सोमं येऽपिबन् द्विजा:॥ ५॥
दीक्षितश्च स राजापि क्षिप्रं नरकमाविशत्।
सह तैर्याजकै: सर्वैर्ब्रह्मस्वमुपजीव्य तत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
चाण्डाल बोला, "हे राजन! बहुत समय पहले की बात है कि एक ब्राह्मण की कुछ गायें अपहरण कर ली गईं। जब उन गायों का अपहरण किया जा रहा था, तो उनके पैरों की धूल दूध में मिलकर सोमरस पर गिर गई और वह दूषित हो गया। जिन ब्राह्मणों ने उस सोमरस को पी लिया, वे और जिन राजाओं ने उस यज्ञ में दीक्षा ली, वे भी शीघ्र ही नरक में चले गए। ब्राह्मण के चुराए हुए धन का उपयोग करके उन यज्ञों को करने वाले सभी ब्राह्मणों सहित राजा भी नरक में चले गए।"
 
The Chandala said, "O King! It happened long ago that some cows of a Brahmin were kidnapped. When those cows were being kidnapped, their foot dust mixed with milk fell on the Som Rasa and contaminated it. The Brahmins who drank that Som Rasa and the kings who took initiation in that Yagya also soon went to hell. The king along with all the Brahmins who performed those Yagyas went to hell by using the stolen wealth of the Brahmin. 5-6.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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