Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.106.17-20h: पिता! हे प्रभु! पूर्वजन्म में मेरा जन्म भी धनवान और कुलीन कुल में हुआ था। मैं ज्ञान-विज्ञान में पारंगत था। इन सब दोषों को जानते हुए भी, अपने अभिमान के कारण मैं सदैव प्राणियों पर क्रोध करता था और पशुओं की पीठ का मांस खाता था; उसी दुराचार और अभक्ष्य पदार्थों के भक्षण के कारण मैं इस दयनीय स्थिति को प्राप्त हुआ हूँ। समय के इस उलटफेर को तो देखो। | mahabharat अध्याय 13.106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिता! हे प्रभु! पूर्वजन्म में मेरा जन्म भी धनवान और कुलीन कुल में हुआ था। मैं ज्ञान-विज्ञान में पारंगत था। इन सब दोषों को जानते हुए भी, अपने अभिमान के कारण मैं सदैव प्राणियों पर क्रोध करता था और पशुओं की पीठ का मांस खाता था; उसी दुराचार और अभक्ष्य पदार्थों के भक्षण के कारण मैं इस दयनीय स्थिति को प्राप्त हुआ हूँ। समय के इस उलटफेर को तो देखो।
Father! O Lord! In my previous life, I was also born in a wealthy and noble family. I was well versed in knowledge and science. Even though I knew all these faults, due to my pride, I always got angry at all creatures and ate the flesh from the back of animals; due to that very bad conduct and eating inedible things, I have reached this miserable state. Look at this vicissitude of time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥