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mahabharat 13.106.16-17h: मेरे इस पापी कुत्ते को देखो, यह पीला, सफ़ेद और कमज़ोर हो गया है। यह कभी इंसान था। लेकिन सभी प्राणियों के प्रति अपने अभिमान के कारण, यह इस दयनीय स्थिति में आ गया है। 16 1/2   |   mahabharat अध्याय 13.106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.106.16-17h 
श्वानं वै पापिनं पश्य विवर्णं हरिणं कृशम्॥ १६॥
अभिमानेन भूतानामिमां गतिमुपागतम्।
 
 
अनुवाद
मेरे इस पापी कुत्ते को देखो, यह पीला, सफ़ेद और कमज़ोर हो गया है। यह कभी इंसान था। लेकिन सभी प्राणियों के प्रति अपने अभिमान के कारण, यह इस दयनीय स्थिति में आ गया है। 16 1/2
 
Look at this sinful dog of mine, it has become pale, white and weak. It was once a human being. But due to its pride towards all creatures, it has fallen into this miserable state. 16 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)