नरकं त्रिंशतं प्राप्य स्वविष्ठामुपजीवति।
श्वचर्यामभिमानं च सखिदारे च विप्लवम्॥ १५॥
तुलया धारयन् धर्ममभिमान्यतिरिच्यते।
अनुवाद
वह तीस नरकों में गिरता है और अंततः अपने ही मल पर जीने वाला कीड़ा बनता है। यदि इन तीन पापों - कुत्ते पालना, अभिमान और मित्र की पत्नी के साथ व्यभिचार - को तराजू पर रखकर धर्मपूर्वक तौला जाए, तो अभिमान भारी पड़ेगा।
He falls into thirty hells and finally becomes a worm living on his own feces. If these three sins - rearing dogs, pride and adultery with a friend's wife - are put on a scale and weighed righteously, then pride will weigh heavier. 15 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥