Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.106.14: यदि वेदों को जानने वाला ब्राह्मण गौओं के पैरों की धूल और दूध से दूषित सोम को विधिपूर्वक बेचता है अथवा ब्याज पर धन उधार देता है, तो वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥14॥ | mahabharat अध्याय 13.106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोमं तु रजसा ध्वस्तं विक्रीणन् विधिपूर्वकम्।
श्रोत्रियो वार्धुषी भूत्वा न चिरं स विनश्यति॥ १४॥
अनुवाद
यदि वेदों को जानने वाला ब्राह्मण गौओं के पैरों की धूल और दूध से दूषित सोम को विधिपूर्वक बेचता है अथवा ब्याज पर धन उधार देता है, तो वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥14॥
If a Brahmin well versed with the Vedas sells Soma that is contaminated by the dust from the feet of cows and its milk in a prescribed manner, or lends money on interest, he soon gets ruined. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥