श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.106.1 
युधिष्ठिर उवाच
ब्राह्मणस्वानि ये मंदा हरन्ति भरतर्षभ।
नृशंसकारिणो मूढा: क्व ते गच्छन्ति मानवा:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - भरतश्रेष्ठ! जो मूर्ख और मन्दबुद्धि मनुष्य क्रूर कर्म करते हैं और ब्राह्मणों का धन चुराते हैं, वे किस लोक में जाते हैं?
 
Yudhishthir asked – Bharatshreshtha! To which world do those foolish and dim-witted people, who engage in cruel acts and steal the wealth of Brahmins, go?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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