श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 105: नहुषका पतन, शतक्रतुका इन्द्रपदपर पुन: अभिषेक तथा दीपदानकी महिमा  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  13.105.38-39h 
एवमेतत् पुरावृत्तं नहुषस्य व्यतिक्रमात्॥ ३८॥
स च तैरेव संसिद्धो नहुष: कर्मभि: पुन:।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूर्वकाल में नहुष के पापों के कारण ऐसी घटना घटी कि नहुष ने बार-बार दीपदान आदि पुण्यकर्म करके मोक्ष प्राप्त किया ॥38 1/2॥
 
In this way, due to Nahusha's sins in the past, such an event occurred that Nahusha repeatedly attained salvation by performing virtuous acts like donating lamps etc. ॥38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)